Navin wrote : "किसी वस्तु की प्राप्ति से पहले आदमी संघर्ष करता है पर बाद में वह कितना सुख अनुभव कराती है यह कौन विचार करता है। आसक्ति वस्तु प्राप्त करने तक ही सीमित है पर उसके उपयोग से सुविधा मिलती है न कि सुख का अनुभव होता है। सुख या आनंद त्याग में है। आपको क्या लगता है दोस्तों,,आज हमारे समाज में जिन रिश्ते नातों से हमें प्यार करना चाहिए,,हम उनका उपयोग करने लगे हैं और जी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए उन्हें हम जान से भी ज्यादा प्यार...? —" |
VISHWAJAGRITI MISSION DELHI PAR AAPKA SWAGAT HE
PLEASE GO UPTO YHE END OF PAGE READ CAREFULLY REGARDING ADIVASI SCHOOL BEING RUN BY MISSION IN JHARKHAND GIVE YOUR AHOOTI IN THIS YAG
Wednesday, November 7, 2012
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