adsense code

VISHWAJAGRITI MISSION DELHI PAR AAPKA SWAGAT HE

PLEASE GO UPTO YHE END OF PAGE READ CAREFULLY REGARDING ADIVASI SCHOOL BEING RUN BY MISSION IN JHARKHAND GIVE YOUR AHOOTI IN THIS YAG

Thursday, November 29, 2012

संघर्ष का फल





Chandan Kumar Nandy
संघर्ष का फल

संघर्ष का फल तकलीफ पाना नहीं संघर्ष से तजुर्बा परिपक्वता का आती है। ये एक
तरह का तपः भी है, जिसके कारन हमें समस्या से जूझने की शक्ति मिलती है और
आनेवाले कोई भी समस्या तजुर्वे के कारन सरल हो जाता है। अगर संघर्ष नहीं
करेंगे तो संकट के समय हो सकता है घबड़ा जायेंगे टूट भी जा सकते है। संघर्ष से
हमें धीरता सहनशीलता सबर क्षमा और संतुसटी प्राप्त होता है। एक उदहारण से
कुछ मालूम पड़ेगा। आप सब जानते है उष्णकटिबंधीय देश और जंहा साल में बहुत
बारिश होता है, उन सब देशो में जमीन में पानी का स्तर काफी ऊपर रहेता है। इसके
कारन इन सब देश में बड़े बड़े पेड़ को आपनी जड़ ज्यादा निचे फैलाना नहीं पड़ता कियोकी
उस जड़ को जमीन के उपरी स्तर में ही पानी का उपलब्धि हो जाता है। मतलब कोई
संघर्ष नहीं करना पड़ता। मगर आप देखे होंगे भारत जैसे देश में जंहा साल में
सिर्फ दो ही महीने बारिश होती ही। बाकी समय ठण्ड गर्मी वसंत ऋतू के कारन जमीन
में नमी नहीं होता। उन दिनों पेड़ को अपना भोजन के जड़ को बहुत दूर और बहुत
निचे के तरफ फैलाना पड़ता है। मतलब संघर्ष करना पड़ता है। इसका नतीजा यह है की
उस पेड़ की जड़े काफी मजबूत होता है और जमीन में उसकी पकड़ तगड़ा हो जाता है।
प्राय हमें देखने को मिलता उन उष्णकटिबंधीय देश और जंहा साल में बहुत बारिश
होता है, जैसे इंडोनेशिया, श्याम्देश, मलयेशिया, उन्हा थोडा सा भी आंधी आती है
तो कई सारे पेड़ उखड जाते है। कियोकी इनकी जड़े जमीन के उपरी भाग में रहेने के
क्कारण इसका जड़ का जमीन के साथ पकड़ कम होता है और थोड़ी सी आंधी उस पेड़ को गिरा
डालता है। ये पेड़ आंधी को सह नहीं पाते। दूसरी तरफ भारत या उस जैसे विपरीत
वातावरण में रहेने वाली पेड़ भारी आँधी में भी टिका हुआ रहेता है। कियोकी इन
सब पेड़ के जड़ काफी निचे जा चूका होता और इसके कारण जमीन में पकड़ तागडा हो जाता
है। इस लगातार संगर्ष के कारन इन सब पेड़ का जमीन के ऊपर काफी पकड़ आ जाता है
और इसीलिए बड़े बड़े आँधी इन्हें हिला भी नहीं सकते है। हमने सुना है अमेरिका
में और भारत देश के कलकत्ता के पास एक पेड़ है जो की हजारो साल पुराना है और
इनकी बहुत सारे जड़ है जिनकी पकड़ जमीन के साथ इतना अच्छा है की कोई भी आँधी इन
पेड़ को नुक्सान नहीं पोंहुचा पाया।
कहेते है जितना जितना हम ऊँचा चड़ेंगे उतना ही आँधी का तेज बढता रहेता है। मतलब
हम जिंदगी में जितना उंचा उठने की कौशिस करेंगे उतना ही संघर्ष करना पड़ेगा। ये
सब हमारे प्रकृति में है जिसे हमें शिखना पड़ेगा। भगवान ने ऐसे ही उदहारण दिए
है प्रकृती से शिखने के लिए। तो पाटा चला आदमी अपना बुद्धि के साथ और भगवान को
याद करते हुए जितना भी संघर्ष करेगा उतना ही धीरता, सहनशीलता, सबर, क्षमा, और
संतुसटी प्राप्त होगा। इसीलिए हमें संघर्ष से कभी भी जी नहीं चुराना
चाहिए। संघर्ष का मुकाबिला करना चाहिए। क्योकि जिन्दगी एक संघर्ष भी है।
हरी ॐ।



No comments:

Post a Comment