चंद्रमा की शोभा बहुत निराली होती है..चंद्रमा शोभायमान तब ही प्रतीत होता है जब वह अपनी सम्पूर्णता को प्राप्त करता है..पूर्णिमा की रात्रि,,चंद्रमा की शोभा सम्पूर्णता के कारण ही दर्शनीय होती है..इसी प्रकार मनुष्य भी शोभायमान तब ही होगा जब वह सम्पूर्णता को प्राप्त कर पायेगा..जब मनुष्य अपने अन्दर छिपी हुई,,दबी हुई सभी कलाओं को विकसित कर पायेगा....अर्ध विकसित अथवा अल्पविकसित मनुष्य केवल दुखों तक ही पहुँच पाता है..सुधांशुजी महाराज
No comments:
Post a Comment