कैसे भूल सकते हें आप इन्हें
* जो जीवन भर अँधेरो से लड़ते रहे आपको उजाला देने के लिए !
* जिनकी बाहों मैं झूलकरआप बड़े हुए !
* जिनकी उंगली पकड़कर आपने चलना सीखा !
* जो सारी सारी रात आपको देते रहे प्यार भरी थपकी
और स्वयं न ले सके एक भी झपकी
* जिन हाथों ने आपको हर ठोकर से बचाया और गिरते हुए सँभाला !
* जिन हाथों ने अपनी अथक परिश्रम की कमाई को आप पर बडे प्रेम से लुटाया !
* जो हाथ सदा आपकी खुशहालीकी कामना से आशीष के लिए उठते रहे आज वे निर्बल ,अक्षम हाथ सहारा पाने के लिए लाचार हें !
आओ कृतज्ञता भरे भावों से उन्हें सँभाले ,उनहे प्रेम ,अपनापन और सम्मान दें ॰
*उनके प्रति श्र्द्धा का दीप जलाएं श्रद्धापर्व मनाएं ,
बृद्धो के प्रति करुणा ,श्रद्धा और आदर से ओत ,प्रोत पुज्य गुरुदेव सुधांशु जी महाराज द्वारा प्रणीत हर 2 अक्तूबर को श्रध्दापर्व मनाएं !
No comments:
Post a Comment