गऊ माता की देह में हें देवों का निवास * गऊ के सीगों की जडों में बृह्मा तथा विष्णु जी का निवास हे ! * सींगों के अग्र भाग में भगवान शिव विराजते हें !
* गौ मस्तक में माँ पार्वती का निवास हे ! * नासिका के बीच कुमार कार्तिकेय का वास हे ! * गौ के दोनों कानों में कम्बल तथा अश्वतर नाम के दो नाग रहते हें ! * गौ की दाईं आंख में सूर्य तथा बाई आंख में चन्द्रमा का निवास हे ! * गौ के दांतों में अष्ट्वसु का वास हे ! * गौ की जिह्वा में भगवान वरुण का वास हे ! * गौ की हुंकार में मां सरस्वती जी का वास हे ! * गौ के गालों में यमराज और यक्ष निवास करते हें ! * गौ के बालों के छिद्रों में ॠषि निवास करते हें ! * गौ के मूत्र में गंगा माता जा निवास हे ! * गौ गोबर में लक्ष्मी जी तथा सभी देवता निवास करते हें ! * गौ के पेट में अग्नि का निवास हे ! * गौ के खुरों में अप्सराएं रहती हें ! * गौ के थनों में चारों समुन्द्र प्रतिष्ठित हें ! * गौ की पीठ में ग्यारह रुद्र तथा कमर में पित्र निवास करते हें !
तुम्हारी महिमा को कोई नहीं समझ सकता ,अपनी महानता को स्वयं समझो ! आसमान में पगडडियां नहीं होती ! अपना रास्ता स्वय ढूंढना पडता हे ! जूझने के लिए स्वयं प्रयास करना पडेगा !बहते हुए आंसुओ को अपने हाथों से पोंछना ! अच्छे के लिए खुद ही अपनी पीठ थपथपाना !दूसरे से प्रेरणा ले सकते हें !मगर इस ताक में मत रहो कि कोई दूसरा आकर आपका सुधार कर देगा ! अपने दोश देखें , मगर हीन भावना न आने दें! आप परमात्मा के पुत्र हें तो परमात्मा के महान गुंण आपमें हें ,अपनी दिव्यता को याद रखो !
जिस व्यक्ति का मिलना सुखदायी हे वह सज्जन हे और जिसका मिलना दुखदायी हे वह दुर्जन हे !सज्जन के बिछुडने से दुख होता हे और दुर्जन के मिलने से पीडा होती हे !